Wednesday, 21 April 2021

इस देश ने लॉन्च की दुनिया की पहली डिजिटल करंसी, बैंक और ATM का झंझट नहीं, मोबाइल से होता है काम

 इस देश ने लॉन्च की दुनिया की पहली डिजिटल करंसी, बैंक और ATM का झंझट नहीं, मोबाइल से होता है काम

    

जो लोग बैंक से नहीं जुड़े हैं या जो बैंक की बहुत सुविधा नहीं ले पाते, उनके लिए यह डिजिटल करंसी खास तौर पर शुरू की गई है. इससे लोगों की सुविधा बढ़ने के साथ ही सरकारी खजाने का खर्च भी घटेगा.


क्रिप्टोकरंसी बिटकॉइन की सांकेतिक तस्वीर


बहामास को ‘टैक्स हेवेन’ के रूप में ख्याति प्राप्त है. टैक्स हेवेन यानी कि जहां देश-विदेश के लोग अपनी कमाई खपाते हैं ताकि टैक्स से बच सकें. बहामास यह सुविधा अमीर लोगों को देता है और इसके बदले कुछ फीस लेता है. अमीर लोगों की रकम जमा होती है और वे टैक्स देने से बच जाते हैं. बहामास में यह सुविधा इसलिए उपलब्ध है क्योंकि वह जानकारी बेहद गोपनीय रखता है. किसी सरकार को इसकी भनक नहीं लगने देता. अब यही बहामास अनोखी तरकीब लेकर आया है. इस तरकीब भी कमाई से जुड़ी है जिसका नाम है सैंड डॉलर करंसी. यह दुनिया की पहली डिजिटल करंसी है.


बहामास सरकार 2020 से ही इस तैयारी में लगी थी जिसे वहां के सेंट्रल बैंक ने अमली जामा पहनाया और अब सैंड डॉलर नाम की डिजिटल करंसी लॉन्च हो गई है. जैसे आप रुपये-पैसे या डॉलर में खरीदारी करते हैं, अब वैसे ही बहामास में सैंड डॉलर नाम की डिजिटल करंसी से भी खरीदारी कर सकेंगे. इसके जरिये बिजनेस किया जा सकता है, खरीद-बिक्री हो सकती है और लोगों को इसे रकम के तौर पर भेज या प्राप्त कर सकते हैं. सैंड डॉलर डिजिटल करंसी को बाहामास सेंट्रल बैंक जारी करता है.



डिजिटल करंसी ही क्यों

बहामास देश का पूरा इलाका 700 छोटे-छोटे आइलैंड पर फैला है. यहां के बैंक के लिए यह मुश्किल है कि वह एटीएम या बैंक के ब्रांच आइलैंड के हर कोने में खोल सके. यह काम मुश्किल होने के साथ महंगा भी है. बैंक के साथ-साथ कस्टमर्स भी इसे नहीं वहन कर पाएंगे. हर आइलैंड पर बेहद कम आबादी बसती है, इसलिए बैंकों का काम बहुत सीमित हो जाता है. मौसम भी इतना विषम होता है कि कोई भी इंफ्रास्ट्रक्चर लगाना मुश्किल काम है और नुकसान का खतरा अलग से है. इसका बड़ा असर वित्तीय सेवाओं की कमी के रूप में देखा जाता है.


मोबाइल वॉलेट से ट्राजेक्शन

जो लोग बैंक से नहीं जुड़े हैं या जो बैंक की बहुत सुविधा नहीं ले पाते, उनके लिए यह डिजिटल करंसी खास तौर पर शुरू की गई है. इससे लोगों की सुविधा बढ़ने के साथ ही सरकारी खजाने का खर्च भी घटेगा. imf.org के मुताबिक, बहामास सेंट्रल बैंक के गवर्नर जॉन रॉले मानते हैं कि किसी व्यक्ति को डिपॉजिट अकाउंट या मोबाइल वॉलेट की तरह सुविधा मिल सके, लोग अकाउंट से अकाउंट में आसानी से ट्रांजेक्शन कर सकें, इसके लिए डिजिटल करंसी पर विचार किया गया.



आपदा में बना अवसर

पहले तो इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया और बहामास के बैंकों, पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर्स और मनी ट्रांसफर ऑपरेटर्स को डिजिटल करंसी मुहैया कराई गई. इस फंड को क्लायंट के डिजिटल वॉलेट में जमा करा दिया जाता है जिसके बाद वे अपने हिसाब से उसका ट्रांजेक्शन कर पाते हैं. आईएमएफ के एक एक्सपर्ट का मानना है कि बहामास में 2019 में आए चक्रवाती तूफान डोरियन और कोविड महामारी ने इस तरह के विकल्पों पर सोचने को मजबूर किया.


डॉलर भी पीछे छूटा

आज बाहामास में सैंड डॉलर का प्रचलन तेज हो गया है और 130,000 डॉलर के सैंड डॉलर सर्कुलेशन में हैं जबकि इसकी तुलना में डॉलर अभी तक 500 मिलियन के ट्रांजेक्शन में इस्तेमाल हो रहा है. जो लोग सैंड डॉलर इस्तेमाल कर रहे हैं उनका काम जल्द होता है और खर्च भी कम लगता है. सबसे बड़ी खासियत है कि इसके ट्रांजेक्शन पर कोई फीस नहीं है या अलग से कोई शुल्क नहीं चुकाना है. अगर किसी को रकम चुकानी हो तो यह काम सेकंड में हो जाता है. बहामास के सभी लोग इससे खुश हैं और खूब इस्तेमाल कर रहे हैं.

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