Sunday, 27 December 2020

दोस्तो की यादे

                            अनोखी मित्रता

छोटे क्लास के बच्चों पर आधारित व कुछ दोस्तों पर आधारित कहानियां  दोस्तों के नाम शुक्ला तिवारी मिश्रा पांडे सत्या शर्मा

 रोज की तरह ये दोस्त आते थे और सभी साथ साथ पढ़ते थे और शाम को अपने अपने घर के लिए चले जाते थे प्रत्येक दिन की तरह सुबह थी जब ये लोग आए और पढ़कर अपने अपने घर जा रहे थे तभी शुक्ला को कुछ शैतानी सूझी और शुक्ला बोलता है चलो तिवारी आज तुम्हें कहीं घुमा कर लाता हूं तिवारी कुछ वक्त के लिए सोचता है और वह मान जाता है और वह शुक्ला के साथ में चल देता है घूमने के लिए लेकिन शुक्ला कुछ दूरी पर लाता है और तिवारी को वहां पर छोड़ देता है तिवारी को बहुत गुस्सा आता है तिवारी घूम कर घर चला जाता है और वह 2 किलोमीटर पैदल चलकर वापस अपने घर जाता है और शुक्ला हंसता हुआ अपने घर को चला जाता है और शाम हो जाती है फिर शुक्ला सुबह पढ़ने के लिए आता है जिस तरह वह रोज आता है और तिवारी सुबह-सुबह पांडे के पास जाता है और पूरी कहानी को सुनाता है उसके बाद में तिवारी बोलता है अब मैं क्या करूं पांडे सोच में पड़ा रहता है लेकिन कुछ बोल नहीं पाता उसके बाद में तिवारी उसके साथ में बैठकर खाना खाता है और वहां से चला जाता है फिर 1 दिन बाद आता है और बैठकर बातें करता है और अचानक अपने लंगड़ा प्रकार को निकालता है बोलता है पांडे ये बड़ा काम का है पांडे के समझ में कुछ नहीं आता वह पूछता है तिवारी कौन सा बड़ा काम का है यह बोलता है भाई इसका जिस तरह यूज करोगे उसी तरह काम करेगा आपकी इच्छा चाहो तो इससे कॉपियों में अच्छी रचनाएं बनाओ चाहो तो इससे लोगों को परेशान करके रख दो लेकिन पांडे के समझ में कुछ नहीं आता उस दिन भी पांडे को कोचिंग के लिए लेट हो रहा होता है और बोलता है तिवारी मैं जा रहा हूं तिवारी बोलता है भाई मुझे भी ड्रॉप कर दो पांडे तिवारी को बैठता है और अपने कोचिंग सेंटर तक ले जाता है वहां पर शुक्ला मिश्रा शर्मा और सत्या सभी एक साथ बैठकर पढ़ रहे होते हैं और पांडे अंदर इंट्री करता है उसके बाद में सभी लोग एक साथ में पढ़ते रहते हैं पढ़ने के बाद में रोज की तरह ये लोग बाहर आते हैं और अपनी साइकिल को चेक करते हैं और साइकिल के लॉक को खोलते हैं शुक्ला भी आता है वह भी अपनी साइकिल के लॉक को खोलता है और जैसे ही वह अपनी साइकिल को नीचे करता है चलने के लिए देखता है उसकी तो हवा ही नहीं अपने  वालों को चेक करता है देखता है  उसकी साइकिल में हवा ही नहीं रहती हैं उसका बाल भी गायब रहता है सभी से बोलता है पांडे शर्मा मिश्रा मेरी तो आज साइकिल की हवा ही निकल गई भाई मेरा वाल चेक करो कहीं आस-पास ही पढ़ा होगा सभी दोस्त हस्ते हुए ढूंढते हैं लेकिन वह वाल कहां से मिले भाई जो वाल तिवारी ही लेकर चला गया था वहां से सभी दोस्त चल देते हैं अपने अपने घर के लिए और पांडे के साथ चल देता है शुक्ला अपने घर के लिए रास्ते में आता है और एक व्यक्ति से वह वालों को लगवाता है और अपनी साइकिल पर बैठता है और तेजी से भाग आता है पान्डे भी उसके पीछे पीछे दौड़ता है लेकिन देखता है वह बहुत तेजी से जा रहा होता है तभी कुछ दूर चलने के बाद उसकी हवा फिर से निकल जाती है बोलता है भाई अब क्या होगा पांडे जी धीरे-धीरे उसके पास पहुंचता है बोलता है भाई फिर से निकल गई उसके बाद में पांडे की साइकिल पर बैठकर वह अपनी साइकिल को लेकर दुकान पर पहुंचता है वहां पर अपने पंचर को खुलवा ता है तब देखता है उसकी साइकिल में लगभग   10  पंचर के आस पास होता है दुकान वाला पूछता है इस को चेंज कर दूं या पंचर बना दूं शुक्ला बहुत कंफ्यूज रहता है बोलता है भाई पंचर बना दो किसी तरह घर पहुंच ज्याता और वहां से पंचर बनवा कर चलता है और रास्ते में एक पागल व्यक्ति खड़ा रहता है उसे बोलता है और कहो पागल उसे दौड़ा लेता है शुक्ला को पांडे बहुत पहले ही समझाता रहता है भाई किसी को हमेशा बुलाते मत रहो लेकिन उसकी वह नहीं सुनता और उस दिन उस पागल से भी वह बोल देता है पागल ऐसे दोड़ाता  है अपने हाथ में स्टिक लेकर कि पान्डेय सोचत है अब शुक्ला को चपका कि तब चपका शुक्ला को भागते भी नहीं बनता कुछ दूर भागता है कि तभी अचानक उसका चैन उतर जाता है पीछे से पांडे आ रहा होता है और आगे से कुछ लड़कियां आ रही होती हैं बोलता है पांडे भाई मैं तो फंसा पांडे बोलता है रोज समझाता था भाई ऐसा मत करा कर लेकिन तू कहां मानने वाला है आज फसवा ही दिया तब किसी तरीके से वह अपने साथ से लेकर शुक्ला को आगे भाग लेता है और फिर दोनों  बच कर अपने अपने घर के लिए चले जाते हैं और जब फिर दूसरे दिन स्कूल पढ़ने आते हैं तो पता चलता है तिवारी ने पंचर किया था लेकिन तिवारी तो खुश था क्योंकि उसने तो पंचर किया था और उसने अपने 2 किलोमीटर पैदल चलने की कसक को पूरा किया था लेकिन शुक्ला बंदर की तरह था हां तो क्या फिर जब मिलता है तिवारी को तो बोलता है तिवारी भाई साहब सब कुछ करना लेकिन पंचर मत करना भाई दोस्तों यह कहानी आपको कैसी लगी तिवारी ने अच्छा    किया या   गलत किया आप सभी कमेंट में राय जरूर दें अपनी-अपनी 
                      अनोखी मिसाल कायम

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